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Rajasthan News: राजस्थान में लुप्त होने के बाद फिर से बहने लगी ये नदी, इन जिलों से होकर गुजरेगी

Khabar Fatafat Desk, Jaipur: देश की सबसे छोटी नदी माने जाने वाली अरवरी नदी राजस्थान के अलवर में स्थित है. अरवरी नदी अब लुप्तप्राय नदी के रूप में मानी जाती है. यह नदी अलवर जिले में करीब 45 किलोमीटर का सफ़र तय करती है. अरवरी नदी 60 सालों तक सूखी रहने के बाद फिर से बहने के लिए चर्चित है।

अरवरी नदी का अलवर जिले में थानागाजी के नजदीक साकरा बांध है, जहां से अरवरी नदी (Arwari River Update) का उद्गम होता है। यह नदी सूखने और फिर से बारहमासी नदी बनने व इसे जीवित करने वाले 70 गांवों के लोगों की कहानी खुद में समेटे हुए है। 

इस गाँव से हुई थी नदी के सुखने की शुरुआत

18वीं शताब्दी के दौरान, अरवरी नदी जिसे प्रतापगढ़ नाले के नाम से भी जाना जाता था। यह घने जंगलों से घिरी एक बारहमासी नदी थी।

स्थानीय आबादी मुख्य रूप से पशुपालन का काम करती थी और उन्हें कम पानी की आवश्यकता पड़ती थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया और परिवारों का विस्तार हुआ, कृषि के विकास के कारण पानी के उपयोग में वृद्धि हुई।

इस अत्यधिक खपत से भूमिगत जल स्तर गिरता गया। लेकिन, अरवरी नदी के सूखने की शुरुआत झिरी गांव से हुई। 

नदी सूखने से जल संकट छाया

यहां 1960 के दशक में संगमरमर की खुदाई का काम शुरू हुआ था। खुदाई जारी रखने के लिये खदानों में जमा भूमिगत जल को लगातार निकाला गया। इस प्रक्रिया ने पानी की कमी को बड़ा दिया गया। आखिर में अरवरी नदी सन 1960 के बाद के सालों में सूख गई।

झिरी गाँव में पानी का संकट गहराया और समय के साथ यह जल संकट पड़ोसी गांवों और आसपास के क्षेत्रों तक फैल गया। जल संकट के परिणामस्वरूप लोग काम की तलाश में शहरों की ओर जाना शुरू कर दिया। 

अंतिम बार अक्टूबर माह में दिखा था बहता पानी

इसके बाद जल परियोजनाओं पर काम करने के लिए तरुण भारत संघ एक स्वयंसेवी संगठन ने इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने पहाड़ियों के नीचे छोटे-छोटे तालाब बनाने शुरू किए जिन्हें जोहड़ कहा जाता है।

बारिश के साथ ये जोहड़ भरने लगे, हालांकि अरवरी नदी अभी सूखी ही थी लेकिन इन भरे हुए जोहड़ों के पानी ने कुओं को भर दिया और लोगों आश जगा दी। आखिर में सन 1990 में अरवरी नदी में पहली बार, अक्टूबर माह तक पानी बहता दिखा। 

तब से अब तक
जिससे लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा और भरोसा मजबूत हुआ। इसके बाद काम को और आगे बढ़ाया गया। आखिर में सन 1995 के आते-आते पूरी अरवरी नदी जिन्दा हो गई और या पूरी तरह बहने लगी। तब से अब तक, अरवरी नदी बारहमासी हो गई जो आज भी बहती है।

Alpesh Bishnoi

अल्पेश पिछले लम्बे समय से डिजिटल खबरी दुनिया से जुड़े हुए है. हालांकि अल्पेश को Finance बीट में काम करने का अत्यधिक अनुभव है लेकिन वो हर क्षेत्र में अपना हुनर इस वेबसाईट पर दिखा रहे है.

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